Tuesday, 22 September 2020

Priceless Thinks of Swamivivekanand

 


स्वामी विवेकानंद एक आध्यात्मिक गुरु तथा समाज सुधारक थे। स्वामी विवेकानन्द ने पुरोहितवाद, ब्राह्मणवाद, धार्मिक कर्मकाण्ड इत्यादि विसंगतियों को दूर करने का अथक प्रयास किया। वे हमेशा से युवाओं के प्रेरणास्रोत रहे हैं। इस लेख के माध्यम से आप स्वामी विवेकानंद के अनमोल विचारों को जानेंगे।

1: उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य की प्राप्ति ना हो जाये।

2: खुद को कमजोर समझना सबसे बड़ा पाप हैं।

3: तुम्हें कोई पढ़ा नहीं सकता, कोई आध्यात्मिक नहीं बना सकता। तुमको सब कुछ खुद अंदर से सीखना हैं। आत्मा से अच्छा कोई शिक्षक नही हैं।

4: सत्य को हज़ार तरीकों से बताया जा सकता है, फिर भी हर एक सत्य ही होगा।

5 बाहरी स्वभाव केवल अंदरूनी स्वभाव का बड़ा रूप हैं।

6 ब्रह्माण्ड की सारी शक्तियां पहले से हमारी हैं। वो हमही हैं जो अपनी आँखों पर हाँथ रख लेते हैं और फिर रोते हैं कि कितना अंधकार हैं।

7 विश्व एक विशाल व्यायामशाला है जहाँ हम खुद को मजबूत बनाने के लिए आते हैं।

8 दिल और दिमाग के टकराव में दिल की सुनो।

9: शक्ति जीवन है, निर्बलता मृत्यु हैं। विस्तार जीवन है, संकुचन मृत्यु हैं। प्रेम जीवन है, द्वेष मृत्यु हैं।

10: किसी दिन, जब आपके सामने कोई समस्या ना आये – आप सुनिश्चित हो सकते हैं कि आप गलत मार्ग पर चल रहे हैं।

11: एक समय में एक काम करो, और ऐसा करते समय अपनी पूरी आत्मा उसमे डाल दो और बाकी सब कुछ भूल जाओ।

12: “जब तक जीना, तब तक सीखना” – अनुभव ही जगत में सर्वश्रेष्ठ शिक्षक हैं।

13: जब तक आप खुद पर विश्वास नहीं करते तब तक आप भागवान पर विश्वास नहीं कर सकते।

14: जो अग्नि हमें गर्मी देती है, हमें नष्ट भी कर सकती है, यह अग्नि का दोष नहीं हैं।

15: चिंतन करो, चिंता नहीं, नए विचारों को जन्म दो I

16: हम वो हैं जो हमें हमारी सोच ने बनाया है, इसलिए इस बात का धयान रखिये कि आप क्या सोचते हैं। शब्द गौण हैं। विचार रहते हैं, वे दूर तक यात्रा करते हैं।

17: जैसा तुम सोचते हो, वैसे ही बन जाओगे। खुद को निर्बल मानोगे तो निर्बल और सबल मानोगे तो सबल ही बन जाओगे।

18: कुछ मत पूछो, बदले में कुछ मत मांगो। जो देना है वो दो, वो तुम तक वापस आएगा, पर उसके बारे में अभी मत सोचो।

19: जो कुछ भी तुमको कमजोर बनाता है – शारीरिक, बौद्धिक या मानसिक उसे जहर की तरह त्याग दो।

20: तुम फ़ुटबाल के जरिये स्वर्ग के ज्यादा निकट होगे बजाये गीता का अध्ययन करने के।

21: वेदान्त कोई पाप नहीं जानता, वो केवल त्रुटी जानता हैं। और वेदान्त कहता है कि सबसे बड़ी त्रुटी यह कहना है कि तुम कमजोर हो, तुम पापी हो, एक तुच्छ प्राणी हो, और तुम्हारे पास कोई शक्ति नहीं है और तुम ये-वो नहीं कर सकते।

22: किसी की निंदा ना करें। अगर आप मदद के लिए हाथ बढ़ा सकते हैं, तो ज़रुर बढाएं। अगर नहीं बढ़ा सकते, तो अपने हाथ जोड़िये, अपने भाइयों को आशीर्वाद दीजिये, और उन्हें उनके मार्ग पे जाने दीजिये।

23: यही दुनिया है; यदि तुम किसी का उपकार करो, तो लोग उसे कोई महत्व नहीं देंगे, किन्तु ज्यों ही तुम उस कार्य को बंद कर दो, वे तुरन्त तुम्हें बदमाश प्रमाणित करने में नहीं हिचकिचायेंगे। मेरे जैसे भावुक व्यक्ति अपने सगे – स्नेहियों द्वारा ठगे जाते हैं।

24: सच्ची सफलता और आनंद का सबसे बड़ा रहस्य यह है- वह पुरुष या स्त्री जो बदले में कुछ नहीं मांगता। पूर्ण रूप से निःस्वार्थ व्यक्ति, सबसे सफल हैं।

25: एक विचार लो। उस विचार को अपना जीवन बना लो – उसके बारे में सोचो उसके सपने देखो, उस विचार को जियो। अपने मस्तिष्क, मांसपेशियों, नसों, शरीर के हर हिस्से को उस विचार में डूब जाने दो, और बाकी सभी विचार को किनारे रख दो। यही सफल होने का तरीका हैं।

26: क्या तुम नहीं अनुभव करते कि दूसरों के ऊपर निर्भर रहना बुद्धिमानी नहीं हैं। बुद्धिमान् व्यक्ति को अपने ही पैरों पर दृढता पूर्वक खड़ा होकर कार्य करना चहिए। धीरे धीरे सब कुछ ठीक हो जाएगा।

27: जब लोग तुम्हे गाली दें तो तुम उन्हें आशीर्वाद दो। सोचो, तुम्हारे झूठे दंभ को बाहर निकालकर वो तुम्हारी कितनी मदद कर रहे हैं।

28: हम जो बोलते  हैं  काटते हैं। हम स्वयं अपने भाग्य के निर्माता हैं।

29: जो सत्य है, उसे साहसपूर्वक निर्भीक होकर लोगों से कहो–उससे किसी को कष्ट होता है या नहीं, इस ओर ध्यान मत दो। दुर्बलता को कभी प्रश्रय मत दो। सत्य की ज्योति ‘बुद्धिमान’ मनुष्यों के लिए यदि अत्यधिक मात्रा में प्रखर प्रतीत होती है, और उन्हें बहा ले जाती है, तो ले जाने दो; वे जितना शीघ्र बह जाएँ उतना अच्छा ही हैं।

30: यदि स्वयं में विश्वास करना और अधिक विस्तार से पढ़ाया और अभ्यास कराया गया होता, तो मुझे यकीन है कि बुराइयों और दुःख का एक बहुत बड़ा हिस्सा गायब हो गया होता।

Monday, 21 September 2020

Success Mantra : सफल होने के लिए सोच-समझकर चुनें अपनी प्राथमिकताएं

 


अपने लक्ष्य के अनुसार ही आपको अपनी प्राथमिकताएं चुननी होती है। ऐसे में कई बार ऐसा होता है कि हम अस्थायी चीजों को अपनी प्राथमिकता समझकर उनपर अपना पूरा ध्यान देने लगते हैं, जबकि ऐसा करने से हमारे हाथ अंत में निराशा ही लगती है। आज हम आपको ऐसे टिप्स के बारे में बताएंगे, जिन्हेंं अपनी प्राथमिकताओं में शामिल करने से आप कभी भी निराश नहीं होंगे और आपको सफलता जरूर मिलेगी-


टाइम टेबल बनाना 

आप कॉलेज, कोचिंग या ऑफिस कहीं भी जाते हैं, अगर आपने कोई लक्ष्य रखा है, तो सबसे पहले अपना टाइम टेबल बनाएं। आप अपने 24 घंटे को किस हिसाब से मैनेज करते हैं, यह बेहद जरुरी है। आप पेपर या मोबाइल चेक लिस्ट में टाइम टेबल सेव कर सकते हैं। 

नींद पूरी करें 

आप अपनी प्राथमिकताओं में नींद को भी जोड़ लें। आपके पास काम निपटाने के अलावा जितना भी टाइम बचता है, उसमें अपनी नींद पूरी कर लें। नींद न लेने की वजह से आपका दिमाग सही से काम नहीं कर पाएगा।

 


आत्मविश्वास और इच्छाशक्ति 

जीवन में कई बार ऐसे मौके आएंगे, जब आपका विश्वास डगमगाने लग जाएगा और आपको लगेगा कि आपका लक्ष्य व्यर्थ है, लेकिन उस वक्त आपको इन नकरात्मकताओं से दूर रहकर आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ना है। 

 


पेपर पर अपने लक्ष्य को लिखें 

इसके लिए आपको थोड़ी दिमागी कसरत भी करनी पड़ेगी। बेहतर होगा कि आप अपना लक्ष्य पेपर पर लिखकर उससे जुड़ी चुनौतियां भी लिख लें, इससे आपको उन चुनौतियों से कैसे लड़ना है, यह भी अंदाजा हो जाएगा। 


समय व्यर्थ करने वाले और नकरात्मक लोगों से दूरी 

आपको समय व्यर्थ करने वाले लोगों और नकरात्मक स्वभाव वाले लोगों से दूरी बनाकर रखनी है। इससे आप अपने लक्ष्य पर ध्यान दे पाएंगे। 

Friday, 18 September 2020

Key of Success

जीवन के बुरे दिन भी देते हैं आगे बढ़ने की प्रेरणा

 आत्मविश्वास आपके भीतर मौजूद एक ऐसी शक्ति है, जो खुद पर भरोसा रखना सिखाती है। आपको यह दिखाने की जरुरत नहीं पड़ती कि आप में आत्मविश्वास है लेकिन कभी-कभी ऐसा होता है कि हम खुद में अपार सम्भावनाएं होने पर भी खुद पर भरोसा नहीं रख पाते। वहीं कभी-कभी ऐसा भी होता है कि हम संघर्ष के दिनों में हम कमजोर पड़ जाते हैं, ऐसे मेें आपको कुछ बातोंं को हमेेेेेशा याद रखना चाहिए, जिससे कि आप बुरे से बुरे दिनों का भी डटकर मुकाबला कर सकें।


दूसरों के साथ न करें खुद की तुलना 

याद रखें कि एक घर में रहने वाले दो लोगों की जीवन यात्रा एक जैसी नहीं हो सकती। ऐसे में अपने संघर्षों को खुद समझते हुए देखें कि आप समय बीतते हुए कितना आगे बढ़ रहे हैं। तुलना करने पर हमेशा एक का महत्व कम हो जाता है। 

अपने शरीर का ध्यान रखें 


एक सेहतमंद शरीर के साथ ही आप कई चुनौतियों का सामना कर सकते हैं। फिट रहने पर आप आत्मविश्वास से भरे हुए होते हैं जबकि कई रोगों से घिरे होने पर आपका ध्यान सिर्फ इन्हीं बातों पर जाता है इसलिए अपने शरीर का ध्यान रखें, जिससे कि आपका आत्मविश्वास बढ़ें। 

 

खुद की गलतियों से सीखें इसे हावी न होने दें 


गलतियां सभी से होती हैं। ऐसे में बहुत जरूरी है कि अपनी गलतियों से सीखें न कि इसे खुद पर हावी होने दें। आप हमेशा अपनी गलतियों के बारे में सोचेंगे, तो आपका आत्मविश्वास डगमगाने लगेगा। 

 

बीते बुरे दिनों को याद करें 


कोई भी बुरे दिन याद नहीं करना चाहता लेकिन जब भी आपका आत्मविश्वास डगमगाने लगे, तो अपने बुरे दिनों को याद करें कि आप कैसे उन दिनों से निकलकर हर दिन बेहतर हुए हैं। इससे आपका आत्मविश्वास बढ़ेगा। 

 

अपनी तारीफ या बुराई को गंभीरता से न लें 


मानव स्वभाव है हमें अपनी तारीफें सुनना पसंद होता है लेकिन तारीफों के पीछे छुपे कारणों को समझना बहुत जरूरी है। खुद का मूल्याकंन करें कि आप में क्या प्रतिभा है। किसी की तारीफ या बुराई को मन से लगाकर न रखें।

Thursday, 26 March 2020

सकारात्मक विचार के उपाय


          आपका दिमाग किसी बैंक की तरह होता है । हर दिन आप अपने दिमाग के बैंक में विचारों को जमा करते जाते हैं । विचारों का यह संग्रह बढ़ता जाता है और आपकी याददाश्त बन जाता है । जब भी आप सोचने बैठते हैं या आपके सामने कोई समस्या आती है तो दरअसल आप अपनी यादों के बैंक से पूछते हैं , ' इस बारे में मैं क्या जानता हूँ ? '
          आपकी यादों का बैंक पहले से जमा किये हुये विचारों के संग्रह में से आपको आपकी मनचाही जानकारी देता है । आपकी यादें ही वह मूलभूत सप्लायर हैं जो आपको नये विचार के लिये कच्चा माल प्रदान करती हैं 
          यहाँ पर दो उपाय दिये जा रहे हैं जिनके प्रयोग से आप अपना यादा । क का प्रभावी उपयोग कर सकते हैं और अपना आत्मविश्वास जगा सकते हैं ।


1).अपनी यादों के बैंक में केवल सकारात्मक विचार ही जमा करें:-
          इस बात को अच्छी तरह से समझ लें । हर आदमी के जीवन में अप्रिय , मश्किल , हतोत्साहित करने वाली घटनाएं होती हैं । परंतु इन घटनाओं के प्रति असफल और सफल लोगों की प्रतिक्रिया अलग - अलग होती है । असफल लोग बुरी घटनाओं को दिल से लगाकर रखते हैं । वे अपने दिमाग से उन्हें नहीं निकाल पाते । रात को भी वे । जिस घटना के बारे में सोचते हुए सोते हैं , वह दिन में हुई कोई अप्रिय घटना ही होती है ।
         दूसरी तरफ आत्मविश्वास से पूर्ण , सफल लोग इस तरह की घटनाओं को भूल जाते हैं । ' सफल लोग अपने यादों के बैंक में केवल सकारात्मक विचार ही रखते हैं ।
          ऐसा करें : उन क्षणों में जब आप अपने विचारों के साथ अकेले हों जब आप अपनी कार चला रहे हों या अकेले खाना खा रहे हों - सुखद , सकारात्मक घटनाएं याद करें । अपने यादों के बैंक में अच्छे विचार डालें । इससे आत्मविश्वास बढ़ता है । इससे आपमें ' मैं सचमुच अच्छा हूँ ' की भावना जागती है । इससे आपका शरीर भी स्वस्थ रहता है । इसका एक बढ़िया तरीका यह है । सोने जाने से पहले , अपने यादों के बैंक में अच्छे विचारों को डाल दें । अपने जीवन की अच्छी बातों को याद करें । यह सोचें कि आपको कितनी सारी चीज़ों के लिये ऊपर वाले का शुक्रगुजार होना चाहिये : आपकी पत्नी या आपका पति , आपके बच्चे , आपके दोस्त , आपका स्वास्थ्य । उन अच्छी चीज़ों को याद कीजिये जो आपने लोगों को आज करते देखा है । अपनी छोटी - छोटी सफलताओं और उपलब्धियों को याद कीजिये । उन कारणों को दुहराइये कि आपको आज जीवित होने के लिये खुश क्यों होना चाहिये ।



2.अपने यादों के बैंक से केवल सकारात्मक विचार ही निकालिये :-
          अगर  हम किसी भी  सकारात्मक  विचार को बार-बार  दोहराएंगे तो इसका मतलब हैं  कि हम इसे  खाद -पानी  दे रहे  हैं। अगर हम इसे  खाद-पानी देंगे  तो यह धीरे-धीरे  खिलकर  हमारा  आत्माविश्वास  बढ़ाएगा  और हमारी सफलता  बढती जाऐगी।
         यहाँ हम आपको एक और महत्वपूर्ण और उत्साहवर्द्धक बात बताना चाहते हैं । आपका मस्तिष्क अप्रिय घटनाओं को भुलाना चाहता है । अगर आप सहयोग करें , तो अप्रिय यादें धीरे - धीरे सिकुड़ती जाती हैं और आपके यादों के बैंक का टेलर उन्हें बाहर निकालता जाता है ।
       ' संक्षेप में , अगर हम उन्हें बार - बार याद न करें तो अप्रिय घटनाओं को भूलना आसान है । अपने यार्दो के बैंक से केवल सकारात्मक विचार ही निकाले । बाकी को यूँ ही बेकार पड़ा रहने दें । और आपका आत्मविश्वास आसमान छू लेगा । आपको ऐसा लगेगा जैसे आप किला फतह कर सकते हैं । आपको लगेगा आप दुनिया की चोटी पर पहुँच सकते हैं । आप जब भी अपने नकारात्मक , खुद को छोटा करने वाले विचारों को याद करने से इन्कार करते हैं तो आप अपने डर को जीतने की तरफ एक बड़ा कदम आगे बढ़ाते हैं ।
          लोग दूसरे लोगों से क्यों डरते हैं ? जब दूसरे लोग हमारे आस - पास होते हैं तो हम इतना आत्म - चेतन क्यों हो जाते हैं ? हमारे संकोच की क्या वजह होती है ? हम इस बारे में क्या कर सकते हैं ?
       दूसरे लोगों का डर एक बड़ा डर होता है । परंतु इसे जीतने का भी एक तरीका है । अगर आप उसे ' सही पहलू ' से देखने की आदत डाल लें तो आप लोगों के डर को जीत सकते हैं

Monday, 23 March 2020

विश्वास जगाये, डर भगाइये


         वास्तव में डर एक शक्तिशाली भावना है। किसी न किसी रूप में डर लोगों को वह हासिल करने से रोकता  है जो वे जीवन में हासिल करना चाहते हैं। 
         इसके लिए सबसे पहले हमें उपचार के पहले की तैयारी करनी होगी। यह जानना होगा की आत्माविश्वास आसमान से आकर हमारे दिमाग में नहीं  घुसता, बल्कि  हासिल  किया जाता  है, विकसित  किया जाता है। कोइ भी  आदमी  आत्माविश्वास  के  साथ  पैदा नहीं  होता। जिन लोगों  में  आत्माविश्वास  प्रचुरता  में  होता  है, जिन्होने चिंता  को जीत  लिया  है, जो हर जगह और हर कहीं  बेफिक्री से  आते-जाते हैं, उन्होंने  यह आत्माविश्वास  धीरे-धीरे  हासिल  किया  है। 


आप भी ऐसा ही कर सकते हैं। यह अध्याय आपको बतायेगा, कैसे। 
          द्वितीय  विश्वयुद्ध में नैवी‌ ने यह फैसला किया कि इसके सभी नये रंगरूटों को तैरना आना चाहिये। इसके पीछे यह विचार था कि तैरना आने से किसी डूबते आदमी की जान बचाई जा सकती हैं।
           जिन लोगों को तैरना नहीं आता था, उनके लिए तैरने की कक्षाएं आयोजित की गई।सतही तौर पर यह देखना मजेदार था कि इतने बड़े-बड़े ,जवान और सर्वसमर्थ लोग कुछ फुट गहरे पानी में कूदने से घबरा रहे थे। इन लोगों को छह फूट ऊॅचे स्टैंड से पानी में कूदना था और पानी सिफॅ ८ फुट गहरा था। हालांकि आसपास बहुत से विशेषज्ञ तैराक खडे़ थे और जान का कोई जोख़िम नहीं था, फिर भी  ये वयस्क लोग बुरी तरह आतंकित थे।
           गहराई से सोचने पर यह दुखद प्रसंग था। उनका डर वास्तविक था। परंतु उनमें और हार के डर के बीच में केवल एक ही चीज़ आड़े आ रही थी,और वह थी नीचे के पानी में छलांग । एक से ज़्यादा बार मैंने देखा कि इन युवकों को बोर्ड से ' अनपेक्षित ' धक्का दे दिया गया । और इसका परिणाम यह हुआ कि पानी से उनका डर हमेशा के लिये दूर हो गया ।
हज़ारों भूतपूर्व नेवी के जवान इस घटना से परिचित होंगे । इस घटना से हमें यह शिक्षा मिलती हैः काम करने से डर दूर होता है । दुविधा में रहने या अनिर्णय की स्थिति में रहने से या काम टालने से हमारा डर बढ़ता है ।
            इसे अभी हाल अपनी सफल नियमों की पुस्तिका में लिख लें । काम करने से डर दूर होता है ।


              कर्म के सिद्धांत पर अमल करें । अगली बार जब भी आपको डर लगे, चाहे डर छोटा हो या बड़ा , अपने आपको संभालें । फिर इस सवाल का जवाब ढूंढे: 'किस तरह के काम से मैं अपने डर को जीत सकता हूॅ ? ' 

अपने डर का कारण खोज लें । फिर उचित कदम उठायें ।
डर और उनके उपचार के कुछ उदाहरण नीचे बताये गये हैं ।

         डर का प्रकार                                   इलाज
1 . रंगरूप के कारण झिझक:- अपना हुलिया सुधारिये । नाई                                     की दुकान या ब्यूटी पार्लर में  जाइये। जूते चमकाइये । साफ और प्रेस किटे हुये कपड़े पहनिये । बेहतर ढंग से तैयार होइये । अच्छा दिखने के लिये हमें हमेशा नये कपड़ों की ज़रूरत नहीं होती । 

2 . किसी महत्वपूर्ण ग्राहक को खो देने का खतरा:-
                                      बेहतर सेवा देने की दगनी कोशिश करें। ऐसी हर चीज़ को सुधार लें जिससे आपके ग्राहकों का आपमें विश्वास कम होता हो ।

3 . परीक्षा में फेल हो जाने का डर:- चिंता में समय गंवाने के                                      बजाय इस समय को पढ़ने में लगायें।

4 . यह डर कि दूसरे  लोग क्या सोचेंगे या क्या कहेंगे:-
यह सुनिश्चित कर लें कि आप जो करना चाहते हैं वह सही है । फिर उस काम को कर दें । किसी भी आदमी ने बिना आलोचना के कोई महत्वपूर्ण काम कभी नहीं किया । 

5 . निवेश करने या घर खरीदने के पहले का डर:- 
सभी पहलुओं पर विचार कर लें ।  फिर फैसला करें । एक बार फैसला करने के बाद आप उसी के हिसाब से काम करें । अपनी बुद्धि और अपने निर्णय में विश्वास रखें ।

6 . लोगों का डर:- चीज़ों को सही नज़रिये से देखें । याद रखें ,                        सामने वाला आदमी भी आप ही की तरह                             एक इन्सान है ।

डर का इलाज करने और विश्वास हासिल करने के लिये ये दो कदम उठायें :
1)डर का असली कारण पता करें । यह तय कर लें कि आप वास्तव में किस चीज़ से डर रहे हैं ।

2) फिर कर्म करें । हर तरह का डर किसी न किसी तरह के काम से दूर हो सकता है ।

            और याद रखें , झिझकने से आपका डर बढ़ता ही है, कम नहीं होता । इसलिये देर न करें, बल्कि तत्काल काम में जुट जायें । फैसला करें । 


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  मिसाइल मैन नाम से फेमस रहे डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम की कही बातें हर उस युवा के भीतर नई ऊर्जा का संचार करती रही हैं जो जीवन से कहीं न कहीं ...